ज्योतिष…१

ज्योतिष-संबंधी मान्यताएँ

ज्योतिष के मुख्य दो भाग हैं- गणित -ज्योतिष और फलित ज्योतिष।

यहाँ फलित ज्योतिष के संदर्भ में शब्दांकन हो रहा  है।

नक्षत्र –  

आकाश-मंडल को २७ भागों में बाँटा गया है और  प्रत्येक भाग को नक्षत्र कहा जाता है। जब चंद्रमा सूर्य से १३.२५ अंश की दूरी पर होता है तब उस फैलाव (विस्तार)  को नक्षत्र कहा गया है। उस विस्तार में अनेक ज्योति-पिण्ड समूह माने गए हैं,   उनसे जो आकृति की कल्पना बनती है उसी के आधार पर उस नक्षत्र का नाम पड़ा है। २७ भागों में बाँटने के कारण नक्षत्र २७ हैं। (गणना में कुछ विस्तार पूरी तरह से ना बँट पाने के कारण उसे अभिजीत नाम से २८वाँ नक्षत्र माना गया है।)  नक्षत्रों के नाम इस प्रकार हैं – 

१.अश्विनी                २.भरणी                             ३.कृतिका                  

४.रोहिणी               ५. मृगशिरा,                        ६. आर्द्रा,

७.पुनर्वसु                 ८. पुष्य                          ९.आश्लेषा,   

१०. मघा                     ११.पूर्वाफल्गुनी              १२उत्तराफाल्गुनी   

१३.हस्त                     १४. चित्र                         १५.स्वाति,

१६. विशाखा                  १७.अनुराधा                १८. ज्येष्ठा,  

१९. मूल                    २०. पुर्वाषाढ़ा                   २१. उत्तराषाढ़ा,

२२.श्रवण                      २३. धनिष्ठा                           २४. शतभिषा,

२५. पूर्वाभाद्रपद                  २६. उत्तराभाद्रपद               २७. रेवती।

नक्षत्रों के अतिरिक्त आकाश मंडल को बारह राशियों और ३६० अंशों मे भी बाँटकर देखा  गया है। भारतीय ज्योतिष में चंद्रमा की कलाओं के आधार पर एक कला की एक तिथि होती  है। कला के साठवें हिस्से को विकला  कहते हैं।

इस तरह –

६० कला = १ अंश,

३० अंश= १ राशि,

सारी १२ राशियाँ ३६० अंश में विभाजित हैं। एक नक्षत्र = १३ अंश, २० कला का माना गया है। एक अहोरात्रि (दिनरात) =६० घटी। प्रत्येक नक्षत्रों को किसी ना किसी देवता के गुणों के अनुसार  समझा गया है।

जारी…

4 Responses to “ज्योतिष…१”

  1. vikas Says:

    prema ji ,
    ye saari jankari kitabo se di ja rahi he ya apna bhi kuch anubhav he is bare me kyoki padkar to lagta he abhitak aap khud ki patrika ko bhi nahi samajh pai he shayad or agar esa ho chuka he to ispast kare………?

  2. प्रेमलता Says:

    अभिजित नक्षत्र?(अट्ठाइसवां)

  3. रिपुदमन पचौरी Says:

    अब अगर सारे आकाश को 360 degrees ( या 360 अंश ) का मानें।
    और
    1 नक्षत्र = 13.25 degree का मानें
    तो
    360 degree /13.25 degree (= १ नक्षत्र) = 27.16 नक्षत्र
    होते हैं। पर अब प्रश यह है कि … 27 नक्षत्र तो सही हैं पर यह 0.16 कहाँ जायेगा ?
    ( क्या इसे negligible मान कर छोड़ दिया जाया है या आकरी नक्षत्र में 0.16 अंश अधिक होते हैं ?

    अब यही गणना अगर
    1 नक्षत्र = 13.20 degree का मानें
    तो
    360 degree /13.25 degree (= १ नक्षत्र) = 27.27 नक्षत्र बनते हैं
    फ़िर वही सवाल …0.27 का क्या होगा ?

    *** शंका का समाधान कीजीये ***

  4. रिपुदमन पचौरी Says:

    ek baat jo hamesh confuse kerti rahi, par baad mein clear hui vo yahan kahanaa chaahoongaa.

    अंश -> ko degree
    कला -> ko minutes
    विकला -> ko seconds bhi kaha jaataa hai

    1 degree = 60 minutes = 60×60 seconds

    seconds kaa bhi denomination hai par abhi yaad nahin .. baad mein likh kar bhejoonga.

    Ripudaman

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