ज्योतिष -२ ‘राशि और उनके स्वामी’

सम्पूर्ण आकाश-मंडल को नक्षत्रों के अलावा ३६० अंश और बारह राशियों में भी बाँटा गया है। ज्योतिष के अनुसार बारह राशियों के नाम और उनके स्वामी इस प्रकार हैं-

१. मेषराशि      स्वामी – मंगल,

२.वृषराशि      स्वामी – शुक्र,

३.मिथुनराशि स्वामी – बुध,

४.कर्कराशि    स्वामी – चंद्रमा,

५.सिंहराशि    स्वामी –  सूर्य,

६.कन्याराशि स्वामी – बुध,

७.तुलाराशि   स्वामी – शुक्र,

८.वृश्चिकराशि स्वामी – मंगल,

९.धनुराशि स्वामी – गुरूबृहस्पति,

१०.मकरराशि स्वामी – शनि,

११.कुम्भराशि स्वामी – शनि

१२.मीनराशि स्वामी – गुरूबृहस्पति। 

इस प्रकार बारह राशियों को नौ ग्रहों में बाँटा गया है। प्रत्येक ग्रह दो राशियों के स्वामी हैं,  जबकि सूर्य और चंद्र्मा एक-एक ग्रह के स्वामी हैं। राहू केतु को प्रकाशहीन अर्थात छाया ग्रह मानते हुए उन्हें किसी राशि का स्वामित्त्व दिया गया नही मिलता।

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9 Responses to “ज्योतिष -२ ‘राशि और उनके स्वामी’”

  1. Anupam Upadhyay Says:

    राहु और केतु सूर्य और चन्द्रमा के पूर्ण अभाव की अवस्था है कोई वास्तविक पिंड नहीं।

  2. रिपुदमन पचौरी Says:

    अच्छा ! पर…. हम जैसे जिसको ज्ञान ना हो … वह .. “छायाग्रह ” जैसे शब्द से क्या समझे!
    इस लिये पूछा।

    धन्यवाद

    • Anupam Upadhyay Says:

      अज्ञानियों के लिए संसार में पशुओं की भांति सोने खाने और साँसे लेने के अतिरिक्त अन्य कुछ भी शेष नहीं है। यदि संसार को, स्वयं को और ब्रह्म को जानना है तो ज्ञानोन्मुखी होना ही होगा।

  3. प्रेमलता Says:

    -ये कोई राशि-पिण्ड नहीं हैं। पोस्ट में भी इन्हें छायाग्रह लिखा हुआ है।

  4. aatmnirjhar Says:

    आपने मेरे इस प्रश्न का उत्तर नहीं दिया :-

    राहू ऊ केतु : physically exists ही नहीं करते ? या exists हैं पर दिखाई नहीं देते ?

    रिपुदमन

    • Anupam Upadhyay Says:

      कभी प्रकाश की और पीठ कर खड़े हो जाइये तो आपको आपकी छाया दिखाई देगी। आपकी छाया का क्या अस्तित्व है ? वही अस्तित्व राहु और केतु का है। राहु और केतु के प्रभाव में (वह जैसा भी हो उसी के अनुसार) जातक का चिंतन मनन और मानसिक विकास प्रभावित होता है। सात्विकता का अधिकांशतः अभाव होता है। राहु अच्छे तो सत्ता वान और कठिन हुए तो भूत प्रेतों और विकृत भय से भय भीत होता है व्यक्ति।

  5. pasand Says:

    जी हां।
    धन्यवाद।

  6. रिपुदमन पचौरी Says:

    राशि के स्वामि को ‘राशिष्वर’ भी कहा जाता है|

    लिखती रहेँ ….
    रिपुदमन

  7. रिपुदमन पचौरी Says:

    iss kaa abhipraay yah bhi hai kee :-
    pratek raashi mein 30 ansh hote hain. yaani 30 degrees.
    poore aakash mandal ko 360 degree mein baantaa gaya hai.
    6 raashiyaan : pritvi ke upper wale aakaash mein dikhtee hain. jo kee 6 raashi x 30 ansh = 180 degrees huaa. jiss ko hum english mein ‘upper hemishpere’ kahete hain. Aur;
    6 raashiyaan : pritvi ke neechey wale aantriksh mein hoti hain aur ve dikhaayi nahin detii. jo kee 6 raashi x 30 ansh = 180 degrees huaa. jiss ko hum english mein ‘lower hemishpere’ kahete hain.

    राहू केतु : physically exists hee nahin karte ? yaa exixts karte hain par dikhaayi nahin dete ?

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