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हाइकू-रामायण

मई 13, 2008

अयोध्या राज।
चक्रवर्ती राजन।
वृद्ध ह्वै जाएं।।

कौशल राज,
सुतविहीन हाय!
भए उदास॥

कीन तपस्या,
मिले ये वरदान,
हो पुत्रवान॥

श्रृंगी बुलाए,
आहुति यज्ञ दिए,
पुत्रकामेष्टि।

बीते नौ मास ,
कौशल्या के गर्भात,
प्रकटे राम।

मात सुमात्रा,
लछमन -शत्रुघ्न,
जनमे साथ॥

जने महान,
कैकई महारानी,
भरतलाल॥

चंचल नैन,
बांकी भृकुटी बैन,
छवि निहाल।।

छन-पैंजनि,
रुम-झुम बाजनि,
चलत-चाल॥

धावत राम,
भजैं पाछे मईया,
मचे ता थै या॥

युगल जोड़ी,
करें क्रीड़ा हो-होड़ी,
खेल-हंसोड़ी॥

गुरु बुलाए,
अवसर मिलाए,
संग पठाए॥

धनुष-बाण,
चौदह-कला ज्ञान,
गुरु की कृपा॥

ज़ारी…

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