Posts Tagged ‘तितली’

यूँहीं घूमते-घूमते मन उनके साथ उड़ चला

मार्च 25, 2009

हम कितने भी दोस्ती का भाव रखते हों पर वे हमसे हमेशा डरती ही हैं। अपने-आप को इतना छिपाने की कोशिश करती हैं कि दिखाई देनी बंद हो जाती हैं।
उनका अपने में मगन रहना और फुदक-फुदक कर चीं-चीं करते हुए इस शाखा से उस शाखा पर जाना, बस क्या कहा जाए मन उनके साथ ही उड़ने लगता है। पर उनका अपने से दूर भागना मन में एक अजीब सी दुखन ला देता है, हाय! हमारा विश्वास नहीं। या हम हैं हीं इतने निष्ठुर!
यूँहीं घूमते-घूमते पेड़-पौधों पर खेलती चिड़िया और नाचती-भागती तितलियों ने हमारा मन मोह लिया तो हमने उन्हें इस तरह अपने पास रख लिया