क्या करें?

कुछ झलकियाँ जिनके  समाधान  में बहुत मेहनत करनी पड़ेगी।
१.
एक व्यक्ति  अपने घर के बाहर रोजाना सफाई करता था। सारा कूड़ा उठाकर घर  के अंदर रखे कूड़ेदान में डालता था। बाद में उस कूड़े को नगर निगम के कूड़े दान में डाल  देता था। उसका पड़ौसी उसके सफाई करने के तुरंत बाद अपना कूड़े  से भरा कूड़ेदान बाहर  रख देता  था। उस व्यक्ति ने अपने पड़ौसी को काफी समझने की कोशिश की पर वह नही माना और उसे धमकाने लगा – ‘ज्यादा मत बोल! यह जगह सबकी है तू कौन है मना करने वाला! हमतो यही रखेंगे तुझसे जो करा जाए करले’ और रोजाना खुला कूड़ा घर केबाहर रखता रहा बेचारा सफाई पसंद व्यक्ति कुछ भी न कर सका।
२.
एक व्यक्ति अपने घर के बाहर सड़क पर अपनी कार  खड़ी करता है पर वह वहाँ कभी सफाई  नहीं कराता कहता है -”यह तो सड़क सबकी है मैं ही क्यों कराऊँ?”
३.
एक साहब फ्लेट की सबसे ऊँची मंजिल पर रहते हैं आते-जाते पान  की पीक औ सिगरेट के टुकड़े पुरे जीने में फेंकते  जाते हैं कोई बोलता है तो कहते है की और लोग भी तो रहते हैं क्या पता किसने फेंका है?
4.
कुछ लोग रात में  अपना कूड़ा दूसरों के घर के आगे फ़ेंक जाते हैं सुबह घर के लोग देखते ही परेशान पर कहें किससे पता नही कौन फ़ेंक गया।

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3 Responses to “क्या करें?”

  1. प्रतिभा सक्सेना Says:

    तभी तुलसी दास जी ने कहा है- दुष्ट संग जनि देहि विधाता !

  2. प्रेमलता पांडे Says:

    बिलकुल अनुराग भाई!

  3. Smart Indian - अनुराग शर्मा Says:

    जंगलियों को सभ्य बनाने में प्रशासन को अपनी भूमिका निभाने की आवश्यकता है, जो कैमरे के सामने चलाये गए झाड़ू अभियानों से काफी आगे की स्थिति है। देखते हैं, हमारी सरकार वहाँ तक जाने में कितना समय लेने वाली है।

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