हमारे तीर्थ- २

गंगोत्री
पिछली बार से इस बार भागीरथी में बहुत ही कम पानी और वेग था जिसकारण नहाने वालों की अपार भीड़ थी|

भागीरथी के किनारे

भागीरथी के किनारे

लोग नहाकर उतारे गीले कपड़े और नए-नए कपड़े भी जल में बहा रहे थे|

पोलीथिन-बैग के बैग जिनमें आलता, चूड़ी-बिंदी इत्यादि श्रंगार का सामान था लोग गंगाजी में फ़ेंक रहे थे| सारी चीजें पत्थरों में अटक रही थीं|
पुजारी पूजा कराकर रोली जल में प्रवाहित करते थे जिससे जल लाल रंग

जल लाल रंग

जल लाल रंग

लेलेता था| सैकड़ों की संख्या में अधजली अगरबत्ती, धूपबत्ती और माचिस की तीलियाँ पड़ी थीं|
किनारे पर ही भागीरथ का मंदिर है, भगीरथ के प्रयास से ही अवतरित हुई जीवनदायिनी पुण्यसलिला क्योंकि भगीरथ ने गंगा की आवश्यकता को समझा था पर…

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