क्या ये सही नहीं रहेगा


आज पढ़ा कि विश्व बैंक गंगा को शुद्ध करने के लिए कुछ राशि देने जा रहा है। ठीक वैसी ही अनुभूति हुई जैसी कि किसी ग़रीब और असहाय की संतान को कोई और पाले। बहुत देर तक सोचती रही। बचपन गंगा के किनारे बिताया है। दिन-रात का कोई प्रहर न होगा जब गंगा का तट न देखा हो। कभी किसी पर्व के बहाने तो कभी मेले के बहाने तो कभी जलसे के बहाने तो कभी टहलने के बहाने।
हमने अपने आसपास के लोगों को सुबह उठकर गंगा में डुबकी मारकर दिन शुरु करते देखा था। पर वे सब गंगा को केवल देवी मानकर ही नहीं पूजते थे। सफ़ाई का इतना ध्यान रखते थे कि कभी चप्प्ल न ले गए जल में, न कुल्ला किया और न गंदे कपड़े धोए – पाप लगेगा ऐसा सोचकर। अमावस्या-पूर्णमाशी को मनों दूध चढ़ता था धाराजी में।

प्रदूषित गंगा को देखकर मन खिन्न हो जाता है। सरकारी रुप से तो न जाने कितनी योजनाएं बनी, अनुमानित राशि लगी कितनी पास हुई सब गंदगी की भेंट चढ़ गयी।
हम सभी तो गंगा को देवी मानते हैं और उससे अपने तारने की याचना भी करते हैं पर उस जीवन देने वाली की कोई परवाह नहीं करते। हम परवाह ही किस की करते हैं। जैसे बूढ़े माँ-बाप के नाम से निमंत्रण-पत्र छापकर उनका मान कर देते हैं ठीक उसी प्रकार गंगा को भी नमस्कार करके अपनी जिम्मेवारी पूरी समझ लेते हैं। सेवा करने का तो हमारे पास समय ही नहीं है।
अगर हम अपनी नदियों को पूजनीय न मानकर आवश्यकता की पूर्तिदायिनी मान ले और अपने स्वार्थ के लिए ही सही उनकी सफ़ाई कराने में सहयोग दें तो क्या उनकी निर्मलता वापिस नहीं आ सकती। जागृति और बस कर गुजरने की भावना होनी चाहिए। सरकार अपना काम करे। हम अपनी ओर से भी तो कुछ कर सकते हैं।
जिन्हें हम पूजनीय मानते हैं चाहे मनुष्य हों चाहे नदियाँ या वृक्ष सभी में प्राण हैं तो फिर काहे हम उन्हें मूर्ति की तरह पूजते हैं? उनके पालन-पोषण की और सेवा की भी तो जरुरत है। संतुलन के साथ हमें अपनी जीवन के दिखावटी और चकाचौंध वाले सुखों के बजट में से कुछ राशि इन सेवा-भावों को समर्पित करनी चाहिए। ऐसा मेरा सुझाव है।

परिवर्तन
बात करने से क्या होगा?
हाथ रखने से क्या होगा?
क़ानून से ना होगा,
सज़ा देने से भी ना होगा,
परिवर्तन तो तभी होगा
जब उतार देगा समाज यह चोगा।

समाज तो हमसे बना है,
हरेक उसमें रमा है,
जब भी परिवर्तन कि बात आती है
हमारी पोलपट्टी खुल जाती है,
परिवर्तन की राह रोक दी जाती है।

इस तरह कुछ ना होगा,
समाज को तोड़ना होगा,
अच्छाई से बुराई को छांटना होगा,
सुख़-दुख़ को बांटना होगा,
कुरीतियों को छोड़ना होगा,
नीतियों को जोड़ना होगा।

परिवर्तन तो तभी होगा,
जब जन जागरण होगा,
जनजागरण तो ज्ञान के प्रकाश में होगा।

पहले इकाई होगी,
फिर दहाई मिलेगी,
धीरे-धीरे सैकड़ा होगा,
बाद में तो सहस्रों सहस्र का रेला होगा,
फिर ना कुछ सोचना होगा,
परिवर्तन तो हर हाल में होगा,
समाज का पुननिर्माण भी होगा।

टैग:

4 Responses to “क्या ये सही नहीं रहेगा”

  1. ताऊ रामपुरिया Says:

    बात करने से क्या होगा?
    हाथ रखने से क्या होगा?
    क़ानून से ना होगा,
    सज़ा देने से भी ना होगा,
    परिवर्तन तो तभी होगा
    जब उतार देगा समाज यह चोगा।

    निहायत ही खूबसूरत विचार हैं. शुभकामनाएं.

    रामराम.

  2. mehek Says:

    sehmat hai.

  3. KISLAY Says:

    आदरणीया
    प्रेमलता जी
    आपके हृदय में गंगा की पवित्रता के प्रति मानसिक उद्वेलन को मैं एक सकारात्मक विचार की संज्ञा देता हूँ.
    यथार्थतः जब तक हम सभी आत्मावलोकन करते हुए स्वस्फूर्त अपने – अपने स्तर पर नदियों की सफाई और पवित्रता की दिशा में आगे कदम नहीं बढायेंगे, तब तक आपकी सोच को रचनात्मक जामा पहनाये जाने में संशय प्रतीत होता है. हम भी जबलपुर मध्यप्रदेश में नर्मदा शुद्धिकरण के बड़े बड़े फरमान जारी करते हैं कुछ प्रक्रिया आगे भी बढती है परन्तु जन सामान्य के जुडाव के अभाव में वही धाक के तीन वाली कहावत चरितार्थ होती है. फिर भी मैं आपकी भावनाओं का आदर करता हूँ.
    आपने बहुत सच लिखा है-
    जिन्हें हम पूजनीय मानते हैं चाहे मनुष्य हों चाहे नदियाँ या वृक्ष सभी में प्राण हैं तो फिर काहे हम उन्हें मूर्ति की तरह पूजते हैं? उनके पालन-पोषण की और सेवा की भी तो जरुरत है। संतुलन के साथ हमें अपनी जीवन के दिखावटी और चकाचौंध वाले सुखों के बजट में से कुछ राशि इन सेवा-भावों को समर्पित करनी चाहिए। ऐसा मेरा सुझाव है।
    – विजय तिवारी

  4. mithilesh Says:

    बिल्कुल सही कहा आपने। हमे दुसरो पर न आश्रित होकर खुद पहल करनी चाहिए।

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s


%d bloggers like this: