प्रभु! यह भाव हमें दीजिए

यह पोस्ट शुद्धरुप से विचार संप्रेषित करने हेतु लिखी है। हम जब भी कहीं भी और किसी के आमने-सामने बैठते हैं तो हर किसी से यह बात अवश्य दोहराते हैं ताकि किसी का कोई सुझाव किसका भला कर दे और भला करवा दे।

आजकल देवी-अनुष्ठान के दिन चल रहे हैं। समापन के समय अष्टमी या नौवीं को लोग बड़े ज़ोर-शोर से कन्या जिमाने का काम करेंगे। पूरी हलवा के साथ-साथ कुछ उपहार जैसा भी देते हैं। लोगों की श्रद्धा देखते बनती है। पर…
मैं यहाँ भिन्न विचार रखती हूँ। पहले बता दूँ तेरह-चौदह साल की आयु से नौ दिन के व्रत रखती आ रही हूँ पर कभी भी इस तरह से कन्या न जिमायी। हमेशा ताक में रहती थी कि किसकी मदद कर सकती हूँ। दान की गुल्लक हमेशा अलग रहती थी।
जब से अपनी आय हुयी तब से कुछ रकम जरुरतमंदों के लिए रख लेती हूँ और चुपचाप कुछ सामान दिलवा देती हूँ। मैं धार्मिक अनुष्ठानों पर दान की अलग मान्यता रखती हूँ। मेरे कुछ सुझाव हैं-
१. अपनी सामर्थ के अनुसार ग़रीब बच्चों के लिए खाना और कपड़ा दान देना चाहिए न कि आसपास के समृद्ध बच्चों को।
२. किसी अनाथ या जरुरतमंद बच्ची के इलाज की दवाइयाँ या अन्य सहायता जैसे फल इत्यादि।
३. झुग्गी में रहने वाले बच्चों के लिए उनको टीन की छत डलवा देना। कुछ ईंटें दान करके उनका फर्श पक्का सा करा देना। किसी के दरवाजे न हों तो लगवा देना। जरुरत के बर्तन दिलवा देना।
४. कई लोग मिलकर एक खाता खोलें और उसमें कुछ पैसा हर महीने डालते रहे। कुछ समय में बड़ी रकम बन जाएगी जिससे किसी गरीब बच्ची की शादी में जरुरत का सामान दिया जा सके।या उनका कोई बड़ा खर्चा किया जा सके। हम कुछ सहेलियाँ मिलकर ऐसा करते हैं।
अगर कुछ लोग मिलकर एक बार में ही एक बड़ी रकम एम.आई.एस में जमा करादें तो हर महीने कुछ रक़म मुफ़्त में ही दान करने को मिल सकती है। काम बहुत है जो हम कर सकते है बस भाव और इच्छा होनी चाहिए। जरुरत में मिट्टी भी सोना लगती है। किसी गरीब का अंतिम संस्कार भी दूसरों की कृपा पर निर्भर होता है।
५. मदद धन से ही नहीं होती समय की मदद भी बहुत बड़ी है। अनपढ़ मां-बाप की संतानों से बातचीत और सलाह देकर भी हम उनकी की मदद कर सकते हैं।
मैं एकादशी का व्रत भी रखती हूँ जिसका उद्यापन बड़े ज़ोर-शोर से होता है। पर मैंने और मेरी कई सहेलियों ने निश्चय किया हुआ है कि किसी अनाथ बच्ची के विवाह में ही सहयोग करेंगे न कि दिखावे का ढोंगी-दान।

केवल एक दिन का न सोचकर योजनाबद्ध तरीके से किया काम कई का भला कर सकता है। हमारे पास जो है उसका कुछ हमें अवश्य निस्वार्थ देने का निश्चय रखना चाहिए।
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दान का संबंध मन से होता है। सारी उपासना और पूजा मात्र क्रिया-कलाप हैं अगर मन में दया और करुणा नहीं।

हमारी बात मान लो!

बहुत हो गया अत्याचार,
फैल गया भ्रष्टाचार,
अब इसे लगाम दो,
विराम की ठान लो,
तभी क्रांति आएगी,
सारे में शांति छाएगी।
हरेक को प्रतिज्ञा करनी है,
पापों की छटनी करनी है।
धन-संपदा की चाहत में
मत फंसो पूरी तरह आफत में।
यह तो नरक का रास्ता है,
बुराइयों का नाश्ता है।
एक बार धन की इच्छा जाग्रत होने पर,
मन नहीं लगता सोने पर।
सपने में भी चालाकी सूझती है,
बार-बार बेईमानी के हल पूछती है।
आत्मा तो मर ही जाती है
बुद्धि बेकाबू हो जाती है।
बस समझ लो भ्रष्टता शुरु हो गयी,
पूरी तरह दृष्टि ख़त्म हो गयी।
कोई दिखायी नहीं देता है,
बस धन का ही ब्यौरा होता है।
शोषण का शौक़ चढ़ जाता है,
ध्रष्टता को भी मौक़ा मिल जाता है।
अपना कोई ना रह पाता है,
किसी का प्यार ना मिल पाता है।
धन कर देता है दूर सबसे,
पास रख देता है बुराई अब से।
समय रहते जान लो,
इस अर्थ को पहचान लो।
यह तो दल-दल है,
जो फंसाता हर पल है।
समाज को तोड़ देता है,
परस्पर अंतर कर देता है।
बराबर खड़े आगे पीछे हो जाते हैं,
हीनता के बीज पक जाते हैं।
कर्त्तव्य-भावना मर जाती है,
ना दूसरों की परवाह रह जाती है।
फिर पछताना पड़ता है,
जीवन कांटों में अड़ता है।
अब इसे सुधार लो,
ज़्यादा है तो दान दो।
सबको एकसा मान लो,
गिरे हुओं पर भी कुछ ध्यान दो।
उठाकर उन्हें खड़ा कर लो,
हाथ पकड़कर साथ चल दो।

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6 Responses to “प्रभु! यह भाव हमें दीजिए”

  1. Chandra Mohan Gupta Says:

    आपकी शुद्ध भावना से भरे इस अप्रतिम लेख ने, आपके लगातार कर्म ने श्रद्धानत कर दिया..ईश्वर से प्रार्थना है कि सबके ह्रदय में आपके सामान सोच चिंतन ही न दें…बल्कि आपकी अभिलाषा के अनुरूप कर्म की भी शक्ति दे.

    अति प्रेरक और अनुकरणीय आलेख के लिए आपका कोटिशः आभार.

    हार्दिक आभार.

    चन्द्र मोहन गुप्त
    जयपुर
    http://www.cmgupta.blogspot.com

  2. loksangharsha Says:

    nice

  3. रंजना. Says:

    आपकी भावना ने श्रद्धानत कर दिया..ईश्वर से प्रार्थना है कि सबके ह्रदय में आपके सामान सोच चिंतन दें…

    अति प्रेरक और अनुकरणीय आलेख के लिए आपका कोटिशः आभार.

    उ०- धन्यवाद!

  4. Pankaj Says:

    बहुत सुन्दर भाव में लिखा है आपने

    धन्यवाद!

  5. nirmla.kapila Says:

    बहुत ही प्रेरणादायक विचार हैं धन्यवाद्

    धन्यवाद!

  6. ताऊ रामपुरिया Says:

    बहुत ही अनुकरणीय और प्रेरक पोस्ट. बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उ०- धन्यवाद! सराहना हेतु, आपका बड़प्पन!

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