माँ तो माँ है।


आज से नवरात्र शुरु हो गए हैं। जब से होश संभाला था अपनी जननी को श्रद्धा-विश्वास और भक्ति के साथ-साथ कड़े अनुशासन से दुर्गा माँ की पूजा और आराधना करते देखा था। अनायास वो सब याद आ गया। जब हम बहुत छोटे थे तो माँ पहले दिन ही याद दिलातीं थी कि कल पूजा करके नाश्ता करना है।
सुबह जल्दी उठकर घर के मंदिर की सफ़ाई और सजावट के बाद हवन और दुर्गा-पाठ करके आरती होती थी। माँ हम बच्चों से ’नाश्ता कर लो’ कहकर स्वयं माला फेरने बैठ जातीं थी। हम खा पीकर अपने काम या मौज-मस्ती में लग जाते पर माँ घंटों मंदिर में ही होती। बाद में आकर जल ग्रहण करती और और बाकी सब काम।
यूँ तो माँ ममता का रुप होती है पर नवरात्रों में वो विशेष ध्यान रखतीं थी कि कहीं वो हम पर गुस्सा न हो जाएँ, डांट न लगाएँ और प्रतिदिन पूजा में हमारे पैर छूती थीं। अपना कोई काम हमसे न करातीं। यदि कभी जिद्द से कर भी देते तो परेशान हो जातीं -’क्यों पाप में डाल रही हो देवियों’।
माँ शक्ति है माँ भक्ति है, माँ ममता है, माँ आस्था है माँ विश्वास है। यूँ तो माँ किसी पल न नही बिसरती पर आज अचानक वो बातें मन में छा गयीं।

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यदि हम दुर्गा माँ से साक्षात मिलना चाहते हैं तो वृद्धाओं और कन्याओं में उनके दर्शन कर सकते हैं। आवश्यकता है तो उस भाव को भरने की जो माँ भवानी की मूर्ति के सम्मुख आता है। उसी भाव से मन को प्रक्षालित करके माँ और माँ जैसियों के प्रति आदर और प्रेम बनाएँ तो सेवा अपने आप करने लग जाएँगे।

जय जननी! जय मात-भवानी! जय कल्याणी!

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6 Responses to “माँ तो माँ है।”

  1. jayantijain Says:

    unique, unparalleled thoughts, mother is great

    धन्यवाद!

  2. रंजना. Says:

    सच कहा….मर्मस्पर्शी भाव ने भावुक कर दिया…आभार आपका..

    धन्यवाद!

  3. albela khatri Says:

    waah !

    sundar !

    badhaai !

    धन्यवाद!

  4. ताऊ रामपुरिया Says:

    बहुत सही संदेश दिया आपने. नवरात्र की हार्दिक शुभकामनाएं.

    रामराम.

    धन्यवाद!

  5. SANJAY SHARMA Says:

    या देवी सर्वभूतेषु मात्रिरुपेण संस्थिता
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः !

    सच में माँ ही दुर्गा , माँ ही काली , माँ ही आराध्य होती है.
    पर ये सोच पैदा तो होती है पर दफ़न हो जाती है तुरत
    जहाँ ये सोच चलन में है .वहां का क्या बताना ?

    धन्यवाद!

  6. meenu khare Says:

    ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी।
    दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥

    नवरात्र की शुभकामनाएँ.

    धन्यवाद!

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