गुरु को नमः

गुरु को नमः

हमने पिछले साल गुरु -पूर्णिमा पर एक लेख लिखा था, चाहूंगी जो यहाँ आए वह लेख भी अवश्य पढ़े।
माता-पिता हमारे प्रथम गुरु होते हैं। उनका प्यार और त्याग ही हमें जीने की कला सिखाता है।
मुझे धार्मिक गुरुओं ने कभी प्रभावित नहीं किया, पर मेरे स्कूली जीवन के अध्यापक और अध्यापिका आज भी मेरे जीवन में वही महत्त्व रखते हैं जितना उस समय रखते थे। उन सब के बारे में लिखना तो असंभव है, पर इतना अवश्य लिखना चाहूंगी कि वे अध्यापक शायद किसी और मिट्टी के बने थे। उनका प्यार और डाँट दोनों ही विशुद्ध थीं। वे आदर्श के अवतार थे।
उन्होंने ही हमें जीवन में परिश्रम और ईमानदारी सिखायी। प्राथमिक-स्कूल के कोई भी अध्यापक अब दुनिया में नहीं हैं, पर उनकी शिक्षाएँ, सिखाने के ढंग और हाव-भाव आज भी मेरे मन में अंकित हैं।
……………………………………………………………………………………

तुम गुरु नहीं हो!

शुक्राचार्य के आश्रम में अनेक शिष्य थे। गुरु उन्हें पाठ सिखाते और समय देते याद करने का। पर उनका एक शिष्य कभी समय पर याद नहीं कर पाता था। गुरु उसे रोज डाँटते और याद करने को कहते। पर शिष्य याद ही नहीं कर पाता था। एक दिन शुक्राचार्य ने गुस्से में आकर उसे प्रताड़ित करके झोंपड़ी में बंद कर दिया। शिष्य दिनभर भूखा-प्यासा रोता रहा। रात को भी बंद रहा।
सुबह होने से पहले अंधेरे में ही गुरुजी नदी में स्नान करने निकल गए। वहाँ पुरुषों के घाट पर एक स्त्री छिपी। गुरुजी ने उसे देख लिया और वहाँ खड़े होने का कारण पूछ। वह स्त्री रो रही थी, उसने गुरुजी से कहा- आप बिल्कुल भी अच्छे गुरु नहीं हैं।
शुक्राचार्य- मैंने क्या कर दिया जो ऐसा कह रही हो।
स्त्री- आपने मेरे बच्चे को बंद कर दिया है।
गुरुजी- क्या करता वह रोज ही पाठ याद नहीं करता।
स्त्री- हाँ-हाँ तभी कह रही हूँ आप अच्छे गुरु नहीं हैं। गुरु तो सर्वज्ञ होता है। सर्वगुण सम्पन्न होता है। आप में गुणोंकी कमी है। आप हृदयहीन हैं, आप में एक माँ का हृदय नही है। जबकि आप में होना चाहिए। माँ अपने बच्चे को प्यार से सिखाती है, धैर्य से समझाती है, क्रोध नहीं करती और इतना कठोर दंड तो कभी भी नहीं देती है। शुक्राचार्य ने उस स्त्री को अपना गुरु मान लिया और उसके पुत्र को मुक्त करके प्यार से सिखाया।
गुरु कोई भी किसी रुप में भी हो सकता है। फिर …

टैग: ,

5 Responses to “गुरु को नमः”

  1. hempandey Says:

    ‘गुरु कोई भी किसी रुप में भी हो सकता है।’ – तभी तो सवा साल की नातिन भी गुरु बन गयी.

  2. Dr.Manoj Mishra Says:

    अच्छी कथा और बेहतरीन प्रस्तुतिकरण.

  3. संगीता पुरी Says:

    बहुत सुंदर !!

  4. ताऊ रामपुरिया Says:

    बहुत सुंदर और शिक्षापरक कथा सुनाई आपने. बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम.

  5. समीर लाल Says:

    अच्छी कथा…गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाऐं.

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s


%d bloggers like this: