उधर क्या चल रहा है?

पता नही क्या चल रहा है। अलग खिचड़ी पकाना तो पुराना मुहावरा है पर आज भी कारगर है। मुहावरे तो कई हैं जैसे बिल्ली खाए न तो बिखेर दे। यह सब तो जीवन का खेला है।

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3 Responses to “उधर क्या चल रहा है?”

  1. vijay Says:

    कुछ हट कर पोस्ट किया है .
    – विजय

    धन्यवाद! विजयजी!

  2. yoginder moudgil Says:

    वाहवा…. ये भी खूब रही..

    – धन्यवाद मोदगिलजी!

  3. समीर लाल Says:

    सही है🙂
    🙂 समीर भाई!

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