और वो चली गई

जीजान से उसने मदद की। बिल्कुल न सोचा रिश्ता-नाता और न सोचा अपना सम्मान। बस कोल्हू के बैल की भांति सभी का ध्यान रखती रही, चेहरे पर बिल्कुल भी शिकन या उदासी लिए बिना सभी की सुख सुविधाओं का ख्याल करती रही।
यूँ वो कोई बहुत साधन संपन्न नहीं थी, पर उसकी शिक्षा और उसका योजनाबद्ध काम करना और प्रबंधन करना ही उसकी टेंशन्फ्री रहने का राज रहा।
वह घर के, बाहर के सभी की सहायता के लिए तत्पर रहती। कोई कहे या न कहे, वह तो बस सबको अपना समझकर उनके साथ जुट जाती। पर हमेशा की तरह लोग उससे मतलब निकालते, उसकी होशियारी का फयदा उठाते और उसे दूध की मक्खी तरह फेंक देते परिणाम के श्रेय के समय।
उसी की योजनाओं को अपने नाम से या अपने किसी अन्य मित्र के नाम से गाते और उसे बड़ा दयनीय बताते। यहाँ तक कि उसके खाना खाने को भी अपनी अच्छाई बताते। अरे! क्या फ़र्क पड़ता है जो एक आदमी और खाले तो।
ऐसा नहीं था निंबौरी जानती नहीं थी कि लोग उसक प्रयोग स्वार्थ के साथ कर रहे हैं।पर वह हमेशा उन्हें नादान समझकर उनकी मदद करती।
एक दिन निबौरी ने देखा कि उनके सगे लोग ही उनसे काम कराकर उनकी पीठ के पीछे उसको बोझ बता रहे हैं।
भई इससे कैसे पीछा छूटे? इसे काहे इतनी इंपोर्टेंस मिले? दूसरे ने कहा- अवॉइड करो। जब काम हो तो तभी ज़रा तारीफ़ कर देना। इसका कौन है जो इसके लिए खड़ा होगा। छोड़ो इसकी क्या परवाह!
निबौरी ने सब सुन लिया। वह बिना बताए चुपचाप अपने घर आगयी। बाद में सबको पता चला तो लोग एक दूसरे से हाथ मिलाकर खूब हंसे – कमाल हो गया अभी तो सोच ही रहे थे कि बला से कैसे पीछ छुड़ाएं, पर वह तो खुद ही चली गयी। अब आसान है। सब को कह दो मिलनसार नहीं है। वरना हमने तो बुलाया था वह खुद ही नख़रे करके चली गयी, हम क्या करें।
निबौरी घर आकर बहुत दुखी हुई। पर उसे दुख अपने लिए नहीं था। वह दुखी इस बात से थी कि नीति की किताबों में जो लिखा है वो ग़लत है या फिर जीवन में लोग जो कर रहे हैं वो ग़लत है। दोनों तो साथ-साथ ठीक नहीं हो सकते।

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5 Responses to “और वो चली गई”

  1. प्रेमलता पांडे Says:

    thanks for comments.0

  2. प्रेमलता पांडे Says:

    सराहना हेतु धन्यवाद बहनों!

  3. संगीता पुरी Says:

    वह दुखी इस बात से थी कि नीति की किताबों में जो लिखा है वो ग़लत है या फिर जीवन में लोग जो कर रहे हैं वो ग़लत है।
    बिल्‍कुल सही कहा….

  4. shobha Says:

    बहुत सुन्दर और भावभीनी रचना

  5. mehek Says:

    niswarth seva karnewale ko duniya tane hi deti hai.bhalai ka zamana kaha,bhut achhi lagi kahani.

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