आदि शक्ति

आदि अर्थात जहाँ से शुरु हो यानि बीज, आदि शक्ति अर्थात नैसर्गिक शक्ति| नौरातें अपनी नैसर्गिक शक्ति के आवाहन का समय है| शक्ति अनेक प्रकार की हैं|अपने अंदर निहित सभी प्रकार की शक्तियों को समझने और उनको बनाए रखने की दृढता हेतु पारायण है नौरात्रे|
मूल शक्तियाँ कमज़ोर भी हो जाती हैं उनको पुनः जागृत करने का अनुष्ठान है| शरीर के कमज़ोर होने पर, मन के कमज़ोर होने पर और इंद्रियों पर नियँत्रण कम हो जाने पर जो जो दुष्परिणाम सामने आते हैं उनसे बचने के लिए हैं यह नव रात्रे|
फलाहर भौतिक शरीर के लिए, तो पूजा-पाठ, भजन-आरती और दीपक की लौ जैसे अनुष्ठान मन को एकाग्रता की ओर सरकाते हैं| जब शरीर और मन दोनों शक्तिशाली हो तो इंद्रियाँ तो स्वयँ चाकरी करने लगती हैं| यही है इन नौ दिनों का महत्त्व जो सिर्फ और सिर्फ हमारी अपनी शक्ति का परिमार्जन,परिष्करण है|

जय शक्तिदायिनी!
जय करो माँ!

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One Response to “आदि शक्ति”

  1. mahendra mishra Says:

    जय भगवती अम्बे मां

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