हू!हू!हू!हिंदी! होय!होय!हिंदी!

((हिंदी-विवश-दिवस पर विशेष)

हू!हू!हू!हिंदी!
होय!होय!हिंदी!
राइट इन हिंदी, रीड इन हिंदी,
फाइट इन हिंदी,प्यार इन हिंदी|

एक
हिंदी मेरी मात्र मातृ-भाषा है| मुआफ़ करें वो ज़रा मेरी हिंदी कमज़ोर है, क्योंकि मुझे इंगलिश आई मीन फॉरन लैंग्वेज पर कमांड ज़्यादा है| एक्चुअल में मेरा सँपर्क टटपुन्जियों से है नहीं| मैं एक इन्टेलेक्चुअल पर्सनलिटि हूँ| हिंदी तो चिरकुट लोग बोलते और लिखते हैं अनपढ्, ज़ाहिल, गंवार, ठेठ इंडियन्स मेरा तो जन्म ही अँगरेजों के मुलाजिमों के घर हुआ| मातृभाषा की बात छोडें, माँ की क्या वह तो पुरानी भाषा बोलती है| अब क्या करूँ रग-रग में अँगरेजी समा गयी है| बडी मुश्किल से हिंदी के शब्द याद आते हैं, कभी अपने सर्वेंट से पूछना पडता है तो कभी दफ्तर के क्लास फोर और थ्री एमप्लॉयी से! ब्हॉट रबिश्!

दो
– अंकल!सॉरी आंटी आपको पता है इन्टरनैट पर हिंदी लिखी जा रही है|
– ब्हॉट्!!! क्या बेबकूफी है| कोई सिरफिरे चिरकुट होंगे जो इन सब फालतू बातों में टाइम बरबाद कर रहे होंगे|
– नहीं ना, अच्छे पढे-लिखे लोग लिख रहे हैं और लिखना सिखा रहे हैं| बहुत सारे … हैं, बडे स्टेण्डर्ड के लोग लिख रहे हैं|
-अच्छा!!!
-हाँ!
-क्या लिख रहे हैं?
– कुछ भी| क्योंकि सब हिंदी को फैलाना चाह्ते हैं| कुछ तो लिखे पर टिप्पणियाँ भी करते हैं|
-टिप्पणियाँ ! यू मीन कॉमेंट?
-हाँ जी|
– ठीक हम भी लिखते हैं|

तीन
हम हिंदी अच्छी लिख लेते हैं हमारा स्तर है ,वर्ग है, यह अलग बात है कि अभी हम दूसरों की कमी निकालने में ध्यान लगा रहे हैं|
क्या करें पर कुछ का न तो स्तर है न वर्ग| न उन्हें लिखना आता है, न लिखे को पढना, सभी के लिखे को अच्छा कहे चले जा रहे हैं| हमारे बराबर नहीं हैं वो| उनका न तो खुद का लेखन स्तर है और न पढने का| सभी को हिंदी लिखने को प्रेरित करे चले जा रहे हैं| बहुत बुरा लगता है|

चार
अरे! यह क्या हिंदी को तो हम प्यार करते हैं, सबकी बराबर मिल्कियत ठोडे ही है| फिर कुछ लोग काहे दुसरों से ज़्यादा प्रसार का काम कर रहे हैं| किसने दिया यह अधिकार! हम समझ रहे हैं इसतरह् वे अपने लोग तैयार कर रहे हैं| पर हम ऐसा नहीं होने देगें| हमें लोग जानते नहीं हम कितने बडप्पन से भरे परिवार से हैं| या तो हम हिंदी के बडे भक्त कहलाए जाए या फिर हम किसी को भक्ति क्या …| समझ गए न! हाँ!

पाँच
(देखो हिंदी भाषियों हिंदी हम सब की माँ है| अगर सपूत हो तो हर हिंदी प्रेमी की हर हिंदी प्रसार की क्रिया को मन से सराहो| सराहने वालों को आरोपित न करो| पहले तो हिंदी फिर हिंदी में विषय| ऐसे ही पहले हिंदीमय तनमनधन, फिर हिंदी में रण| आई बात समझ नाटक तो करो मत| माँ के नाम पर लडो मत| एक भी … न दीख रहा| सब को माँ की वसीयत की पडी है कि किसके हिस्से में क्या आ सकता है| जो सिर्फ माँ की सोच रहे हैं उनको चुनौती मत दो| मुँह के बल गिर जाओगे| )

-यह कौन है?
-आदर्शवादी के खानदानी लगे है|
– हाँ लगता तो ऐसा ही है|
– इसे रोको वरना हमारी बराबरी करने लग जाएँगे लोग| हमने यूँ ही हिंदी में लिखने की ठोडे हे सोची है|हम अद्वितीय हैं| हिंदी के बारे में नहीं हमारे बारे में सोचो| हिंदी अगर फैल गयी तो हमें कौन पूछेगा| इसलिए इन जोशीले, न्यायप्रिय और सच्चे सपूतों को गिराओ! धूल उडाओ ताकि न तो इन्हें मौका मिले और न अन्यों को| हम अच्छे लेखक है, हमारी रिश्तेदारी औए उठना बैठाने पुराने हिंदी वालों से है| बस और कुछ मत करो, इन तेज रफ्तार हिंदी दौडानेवालों के काँटा चुभो दो|

छः

-हाय!!! हाय्!!! हाय!!!
– हिंदी! तुम क्यों चिल्ला रही हो?
-अरे चिल्लाऊँ न तो क्या करूँ? ये मेरी अपनी औलाद ही मेरी छिछ्लेदारी कर रही है| कोई इन्हें समझाओ, ये मेरा नहीं अपना अस्तित्त्व खोने की तैयारी कर रही है|ये दशा तो मेरी कर दी| हालत ये है कि मैं अक्षर-अक्षर और मात्रा-मात्रा तक से बीत गयी हूँ| जिन्होंने मेरे जानमाल की रक्षा करी उनकी जान के लाले पड रहे हैं, लुटेरे खून चूस रहे हैं और सीना ज़ोरी भी कर रहे हैं| मुझे तो अपने गरीब बच्चों का ही सहारा है|

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6 Responses to “हू!हू!हू!हिंदी! होय!होय!हिंदी!”

  1. कुछ इधर-उधर की… « पसंद Says:

    […] करने के लिए होती हैं। इसी विषय पर हमने कुछ लिखा था। पर माजरा कुछ और है। बचपन में […]

  2. प्रेमलता पांडे Says:

    – धन्यवाद! समीर भाई|

    – संजय लेख पढने और सलाह के लिए धन्यवाद|

  3. समीर लाल ’उड़न तश्तरी वाले’ Says:

    करारा कटाक्ष!!

    हिन्दी में नियमित लिखें और हिन्दी को समृद्ध बनायें.

    हिन्दी दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.

    -समीर लाल
    http://udantashtari.blogspot.com/

  4. संजय Says:

    shobha को समझ न आया हो लेकिन मैं समझ गया कि आप क्‍या कहना चाहती हैं… आपकी बात से सहमत हूं.
    खैर यदि आप रेमिंग्टन की बोर्ड लेआउट का इस्‍तेमाल कर रहे हैं तो । लगाने के लिए शिफ्ट के साथ 1 दबा कर लिखें. इनस्क्रिप्‍ट का इस्‍तेमाल करते हैं तो शिफ्ट के साथ > को दबाएं । बन जाएगा। तब आपको | लगाकर । लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. धन्‍यवाद

  5. प्रेमलता पांडे Says:

    शोभाजी! टिप्पणी हेतु धन्यवाद| यह दशा कम ज़्यादा हर क्षेत्र की है| हम व्यक्तिगत बातों में उलझ जाते हैं या उलझा देते हैं| काम की बात पीछे हो जाती है|
    मेरे ब्लॉग के राजभाषा वर्ग के अन्य लेख पढने का कष्ट करें|

  6. shobha Says:

    मैं समझ नहीं पाई आप क्या कहना चाहती हैं. ये तो आज की दशा है पर समाधान तो हम लोगों को ही धुन्दना पड़ेगा. क्या वो अकेले दोषी हैं?

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