प्रचंड वेगिनी

बद्रीनाथ से कुछ ही दूरी पर माणा गाँव है। जो भारत का अंतिम गाँव माना जाता है कहते हैं उसके बाद चीन की पहाड़ियाँ शुरु हो जाती हैं। माना गाँव और बद्रीनाथ के बीच में गणेश गुफा और व्यास गुफ़ा पड़ती हैं,

उसके नज़दीक ही सरस्वती गिरती है।

कथा  प्रचलित है कि वेदव्यास अपनी गुफ़ा से बोलते जाते थे और गणेशजी लिखते जाते थे, इसप्रकार वेदपुराण लिखे गए। सरस्वती इतने वेग और ध्वनि से नीचे गिरती थी कि व्यासजी ने सरस्वती को बारबार समझाया कि ध्वनि कमकरले व्यवधान होता है पर वो मानी ही नहीं तब व्यास ने उसे धमकाया कि वे उसे छिपा देंगे तब भी सरस्वती मानी तो व्यास ने उसे अलकनंदा में मिला दिया। पर सरस्वती का वेग और धवनि आज भी पूरे प्रचंड रुप में देखा जा सकता हैं। ऊँचाई से और प्रबल वेग से गिरने के कारण इतना शोर मचाती है और छींटे फेकती है कि हर कोई डरा सा हो जाता है। उसकी विकरालता देखकर लगता है पता नहीं क्या करके रहेगी।

 

 

 

 

 

 

 

 

सरस्वती बीच में एक बहुत बड़ी चट्टान नदी के बिल्कुल बीचोंबीच अटकी हुई है, कहते हैं कि यह भीम का पुल है। जब पांडव हिमालय पर चढ़ रहे थे तो बीच में सरस्वती आगयी। द्रोपदी को पार उतारने के लिए भीम ने एक बड़े पाषाड को गिराकर नदी पार करायी। उसके आगे स्वर्गारोहण मार्ग है। वहाँ से पांडव स्वर्ग चले गए।

जो एक बार सरस्वती को देख ले वह उसकी प्रचंडता कभी भूल नहीं सकता। 

 

 

 

 

 
 
 

 

 

 

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4 Responses to “प्रचंड वेगिनी”

  1. प्रेमलता पांडे Says:

    धन्यवाद तरुण! चट्टान का पुल ही तो भीम का पुल कहलाता है। कुछ फोटो और प्रकाशित करने की कोशिश करुंगी।

  2. Tarun Says:

    Maana gavn ke paas hi ek pathar ki ek chattan ka pul hai, aapne uska photo bhi lagana chahiye tha.

    Last time jab Uttarakashi wala earth quack aaya tha, Tab hum wohin badrinaath me aaram farma rahe thai, I mean trek per gaye hue thai.

  3. प्रेमलता पांडे Says:

    thanks for comment ravi bhai. I’ll try.

  4. रवि Says:

    कुछेक साल पहले बद्रीनाथ गया था. माणा गांव नहीं जा पाया था. अगर माणा गांव के कुछ चित्र हों तो उन्हें भी दिखाएं.

    हिमालय के पहाड़, प्राकृतिक वादियाँ – एक बार देखने के बाद, सच है कोई भूल नहीं सकता.

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