बसंत है???

ठंड न जाए,

बादल भी छाए ,

हवा हि सताए,

तो क्या बसंत है?

पतझड़ बहारें,

सूखी हैं डालें,

पंछी न गावें, तो क्या बसंत है?

मौसम भ्रमाया,

मन डरपाया,

कैसी यह माया,

कैसा बसंत है?

खिलते थे फूल,

उड़ती थी धूल,

हरियातीं थी मूल,

कहाता-बसंत है!

न कच्ची ज़मीनें

न पेड़ों की लकीरें,

कंकरीट की झीलें,

कैसे बसंत है?

बिल्डिंग उगाओ,

पीला पुतवाओ,

पंछी खुदवाओ,

वोही बसंत है?

जागो तो अच्छा,

सोचो तो बच्चा,

हो तरु-भक्त सच्चा,

तभी बसंत है।

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One Response to “बसंत है???”

  1. mehhekk Says:

    sahi hai phir kaisa basant,sundar kavita

    Ans- thanks for comment.

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