गाँव में – गर्मियों में आम …

यूँ  तो दुनिया तेज़ी से बदल रही है,  गाँव ही शहर में बदल रहे हैं। पर अब  भी पुरानी चीजों का क्रेज़ गया नहीं है। कुछ खाना-पीना अब भी पहले की तरह बरक़रार है।

गर्मियों में आम सर्वाधिक लोकप्रिय और फसली फल है।  इसका हर भाग फायदेमंद होता  है। बारी-बारी से सबकी चर्चा रहेगी।

आम का फल कच्चा और पक्का दोनों ही प्रयोग में लाया जाता है। आज इसके कच्चे फल  को ले रहे हैं। कच्चा आम  गर्मियों में  औषधि है। इसके सेवन से लूँ नहीं लगती हैं।

कच्चा आम सर्वाधिक तो अचार और चटनी के रुप में प्रयोग में आता है, परंतु इसका पन्ना भी बहुत ही लाभकारी है। चलो पन्ना बनाते हैं।  

आम का पन्ना  

चार गिलास पन्ना बनाना है तो-चार बड़े कच्चे और  खट्टे आम ( आम की कई प्रजातियाँ है, सभी बहुत खट्टे नहीं होते हैं।) धोकर उनकी डंठल  चाकू से हटा दें,  और थोड़े पानी में आग पर उबाल लें।  ठंडा  होने पर उनका छिलका छीलकर गुठली को अलग कर दें। अब गूदे को  साढेचार गिलास साफ़ पानी में पुनः उबलने रख दें। उबलते समय ही इसमें  स्वादानुसार सफ़ेद और काला नमक,   चीनी या गुड़  और एक लौंग डाल दें और पकने दें। इसी समय   उसमें भुना हुआ जीरा, काली मिर्च और लाल मिर्च का पाऊडर स्वादानुसार डाल  लें। जब  उबलते हुए  चार गिलास रह जाए तब उतारकर किसी बर्तन में मोटे छेद वाली छलनी से  छान ले  और  फ़्रिज में ठंडा करलें।  अब चार  गिलासों में    डालकर इसे  ताज़े हरे  पोदीने की पत्तियों से सजाकर पीने को दें।

लाभ-

यह लूँ  और गर्मी से तो बचाता ही है, साथ ही साथ हैजा और अतिसार होने से भी बचाता है। इसके नियमित पीने से घमोरियों से बचाव होता है और  पाचन शक्ति मजबूत होती है। 

यह एक सबसे  सस्ता,  बनाने में सबसे सरल ,   शुद्ध स्वादिष्ट  और लाभकारी भारतीय पेय है।

2 Responses to “गाँव में – गर्मियों में आम …”

  1. pasand Says:

    धन्यवाद। बॉट्लिंग कंपनियों की नज़र नहीं गयी तो कौन सी कुटीर-उद्योग वालों की गयी है। वे चाहे तो वे भी कमा सकते हैं।

  2. रवि Says:

    “यह एक सबसे सस्ता, बनाने में सबसे सरल , शुद्ध स्वादिष्ट और लाभकारी भारतीय पेय है।”

    सही है. पता नहीं बॉटलिंग कम्पनियों को इसके स्वाद पर नजर क्यों नहीं गई नहीं तो इसकी मार्केटिंग में करोड़ों का मुनाफ़ा हो सकता है – खासकर गर्मी में – लू लगने से बचने के लिए इसे एक प्रिवेंटिव कारक के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है.

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