वर्ष और संवत्सर (ज्योतिष-८)

वर्ष- 

ज्योतिष में पाँच प्रकार के वर्ष बताए गए हैं।

१. चांद्र वर्ष –  सामान्यतः यह  १२ मास अर्थात  ३५४ दिनों का  होता है, परंतु अधिमास में यह ३८४ दिनों का होता है।

२. सौर वर्ष  एक संक्रांति से दूसरी संक्रांति  के बीच के समय को सौर मास कहते हैं। बारह राशियों में  सूर्य के संक्रमण को सौर वर्ष कहा गया है।

३.  सावन वर्ष – बारह सावन मास को सावन वर्ष कहा गया है।

४. नाक्षत्र वर्ष-  चंद्रमा के सभी नक्षत्रों में संचरण की  अवधि को नाक्षत्रमास कहा गया है। बारह नाक्षात्रमासों का एक नाक्षत्रवर्ष  कहलाया। यह ३२४ दिनों का होता है।

५. गुरु वर्ष – मेषादि बारह राशियों में बृहस्पति का संचरण पूरा होने पर ३६१ दिनों का गुरुवर्ष होता है।

 सामन्यतः चांद्र वर्ष और चांद्रमासों को ही ग्रहण किया  जाताहै। चांद्र वर्ष या चांद्रसंवत्सरों  की कुल  भेद या प्रकार  साठ हैं। इनकी पुनरावृति होती रहती है।

ब्रह्मविंशति संवत्सर-

 १. प्रभव, २.विभव, ३. शुक्ल. ४. प्रमोद, 

५. प्रजापति, ६. अंङ्गिरा,७. श्रीमुख,८. भाव,

९. युवा, १०. धाता, ११. ईश्वर, १२. बहुधान्य,

१३. प्रमाथी, १४. विक्रम, १५. वृष, १६. चित्रभानु,

१७. स्वर्भानु, १८. तारण, १९. पार्थिव, २०. अव्य।

 विष्णु विंशतिसंवत्सर-

२१.सर्वजित २२. सर्वधारी,२३. विरोधी, २४. विकृति,

२५. खर,  २६. नंदन, २७. विजय, २८. जय,

२९. मन्मथ, ३०. दुर्मुख, ३१. हेमलंब, ३२. विलंबी.

३३.विकारी, ३४. शार्वरी, ३५. प्लव, ३६. शुभकृत,

३७. शोभन, ३८. क्रोधी, ३९. विश्वासु, ४०. पराभव।

रुद्रविंशति संवत्सर-

४१. प्लवङ्ग, ४२. कीलक, ४३. सौम्य, ४४. साधारण,

४५. विरोधकृत,  ४६. परीधावी, ४७. प्रमादी, ४८. आनंद,

४९. राक्षस,  ५०. नल , ५१. पिंगल, ५२. कालयुक्त,

५३. सिद्धार्थी, ५४. रौद्र, ५५. दुर्मति, ५६. दुंदुभि,

५७. रुधिरोदगारी, ५८. रक्ताक्ष, ५९. क्रोधन, ६०. क्षय। 

2 Responses to “वर्ष और संवत्सर (ज्योतिष-८)”

  1. प्रेमलता Says:

    – भारतीय ज्योतिष चंद्रमा पर आधारित है।
    – संवत्सरों के नाम लाक्षणिक हैं। ( भागवतपुराण)
    – साठ के बाद पुनः पहला संवत्सर आता है।

  2. रिपुदमन पचौरी Says:

    “सामन्यतः चांद्र वर्ष और चांद्रमासों को ही ग्रहण किया जाताहै। ” :-
    यह बात समझ में नहीं आई।

    “”चांद्र वर्ष या चांद्रसंवत्सरों की कुल भेद या प्रकार साठ हैं।” :-
    किस आधार पर यह भेद किये गये हैं ?

    “इनकी पुनरावृति होती रहती है।”
    इस का क्या मतलब हुआ।

    रिपुदमन

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