रक्षाबंधन

श्रावण-मास
शुक्ल-पक्ष पूर्णिमा
रक्षाबंधन।

बहिन-भाई
राखी रोली चावल
मुँह मिठाई।

राखियाँ सोहें
भ्राता-भगिनी मोहें
खुशियाँ जो हैं।

शुभ मनाएँ
राखी बांधें या भेजें
भाई चहकें।

यह त्योहार
बाल-वृद्ध जवान
खुश समान।

बंधन-देखें
राखी नेट पर हैं
मन से सोचें।

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2 Responses to “रक्षाबंधन”

  1. MAN KI BAAT Says:

    dhanyavaad manIsh jI. haiku bhi to likhe hain.

  2. Manish Says:

    फोटोशाप पर राखी की सुंदर झड़ियाँ लगादीं आपने तो !

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