संक्षेप में


राह चलते चलते
पत्थर से जो टकराया,
बड़ी मुश्किल से
गिरने से बच पाया।
फिर भी पैर तो
रक्त से लथपथाया।
पर संतोष है कि
भविष्य में ठीक से
चलना तो आया।


धोखे से वार करने वालों
वार का मतलब तो जानो,
वार करने वाले वीर होते हैं,
सामने डटते हैं और धीर होते हैं।
पीछे से वार करने वाले होते हैं कायर,
वीरता तो दूर मन पूरी तरह
होते हैं घायल।


उड़ती तो पतँग भी है
पर पँछी नहीं होती।
लगती ही तो उड़ती सी है
पर डोर से बँधी होती।
घूम सकती है उतना
जितनी डोर हो साथ।
पँछी तो उड़ता है चाहे जितना
आता नहीं कभी किसी के हाथ।

(१ एवं ३ अनुभूति में प्रकाशित हो चुकी हैं।)

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9 Responses to “संक्षेप में”

  1. MAN KI BAAT Says:

    सभी को धन्यवाद। शुऎब मैं तो मन की बात कह देती हूँ।
    -प्रेमलता

  2. SHUAIB Says:

    मुझे कावीता लिखना नहीं आता मगर मगर दूसरों का पढ कर कुछ समझ में आता है। आपके का हर एक शब्द बहुत सही लिखा है।

  3. madan Says:

    सुन्दर भावपूर्ण रचना

  4. SHUAIB Says:

    सभी बहुत खूब हैं

  5. अनूप शुक्ला Says:

    तीनों बातें बढ़िया बताईं आपने।अच्छी लगीं।

  6. ratna Says:

    सभी रचनाएं सुन्दर है ।

  7. संजय बेंगाणी Says:

    तीनो ही पसन्द आई. बहुत खुब.

  8. RC Mishra Says:

    तीनों ही क्षणिकायें अत्यंत भावपूर्ण हैं।
    लिखते रहिये,
    धन्यवाद!

  9. Manish Says:

    पीछे से वार करने वाले होते हैं कायर,
    वीरता तो दूर मन पूरी तरह
    होते हैं घायल।

    ये पंक्तियाँ खास तौर पर पसंद आईं !

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