खुशियाँ!!!
December 29, 2007हाथी निकल गया, बस पूंछ की नोक बाक़ी है। साल बीत गया बस दो दिन बीतने बाक़ी हैं। यह इस साल की सबसे बाद वाली पोस्ट रहेगी। यह साल वैसे तो साधारण ही रहा पर एक बात- कुछ क्या बहुत कुछ खास रही। परिवार में नयी दुलहन आयी। दुलहन क्या जीता जागता खिलौना है। उच्च शिक्षा प्राप्त देश-विदेश में घूम चुकी गुड़िया सी जब पैरों को हाथ लगाती है और प्यार से बोलती है तो फूल झड़ते हैं। ईश्वर उसे जीवन की हर खुशी नसीब करे। आजकल सोचने कहने और करने के लिए वह ही विषय-वस्तु है। घर में रौनक है, खुशियाँ हैं और चहक भरी है। -
सजी संवरी,
रुपसी या अप्सरा,
ओह! सुंदरा।
केश हैं खुले,
बैन हैं नपे-तुले,
नैन हैं सधे।
पर्दा न आज,
विवाह एक काज!
न कोई राज।
देखे जिधर,
सारे देखें उधर,
कहाँ नज़र?
सभी के जीवन में खुशियों की बहार आए! नया साल यादगार बन जाए!