Archive for the ‘हलचल’ Category

हमारे तीर्थ- २

जुलाई 2, 2012

गंगोत्री
पिछली बार से इस बार भागीरथी में बहुत ही कम पानी और वेग था जिसकारण नहाने वालों की अपार भीड़ थी|

भागीरथी के किनारे

भागीरथी के किनारे

लोग नहाकर उतारे गीले कपड़े और नए-नए कपड़े भी जल में बहा रहे थे|

पोलीथिन-बैग के बैग जिनमें आलता, चूड़ी-बिंदी इत्यादि श्रंगार का सामान था लोग गंगाजी में फ़ेंक रहे थे| सारी चीजें पत्थरों में अटक रही थीं|
पुजारी पूजा कराकर रोली जल में प्रवाहित करते थे जिससे जल लाल रंग

जल लाल रंग

जल लाल रंग

लेलेता था| सैकड़ों की संख्या में अधजली अगरबत्ती, धूपबत्ती और माचिस की तीलियाँ पड़ी थीं|
किनारे पर ही भागीरथ का मंदिर है, भगीरथ के प्रयास से ही अवतरित हुई जीवनदायिनी पुण्यसलिला क्योंकि भगीरथ ने गंगा की आवश्यकता को समझा था पर…


Follow

Get every new post delivered to your Inbox.