


हम कितने भी दोस्ती का भाव रखते हों पर वे हमसे हमेशा डरती ही हैं। अपने-आप को इतना छिपाने की कोशिश करती हैं कि दिखाई देनी बंद हो जाती हैं।
उनका अपने में मगन रहना और फुदक-फुदक कर चीं-चीं करते हुए इस शाखा से उस शाखा पर जाना, बस क्या कहा जाए मन उनके साथ ही उड़ने लगता है। पर उनका अपने से दूर भागना मन में एक अजीब सी दुखन ला देता है, हाय! हमारा विश्वास नहीं। या हम हैं हीं इतने निष्ठुर!
यूँहीं घूमते-घूमते पेड़-पौधों पर खेलती चिड़िया और नाचती-भागती तितलियों ने हमारा मन मोह लिया तो हमने उन्हें इस तरह अपने पास रख लिया
October 1, 2009 at 16:37 |
दूसरी फोटो में कौन है
फोटो चुप है
मौन है
May 2, 2009 at 17:57 |
ye titliyan un abhivyakti ko darsha rahi hain jo aake hriday me ab bhi vidyaman hain . photo-graphs says the things which anyone and every want to say ………..
aur sabke ant me ,सुन्दर चित्र और सुन्दर अभिव्यक्ति।
March 26, 2009 at 23:54 |
अच्छी पोस्ट …
March 25, 2009 at 15:45 |
सुन्दर चित्र और सुन्दर अभिव्यक्ति।
March 25, 2009 at 15:16 |
photos bahut sahi hain