यूँहीं घूमते-घूमते मन उनके साथ उड़ चला

By प्रेमलता पांडे

हम कितने भी दोस्ती का भाव रखते हों पर वे हमसे हमेशा डरती ही हैं। अपने-आप को इतना छिपाने की कोशिश करती हैं कि दिखाई देनी बंद हो जाती हैं।
उनका अपने में मगन रहना और फुदक-फुदक कर चीं-चीं करते हुए इस शाखा से उस शाखा पर जाना, बस क्या कहा जाए मन उनके साथ ही उड़ने लगता है। पर उनका अपने से दूर भागना मन में एक अजीब सी दुखन ला देता है, हाय! हमारा विश्वास नहीं। या हम हैं हीं इतने निष्ठुर!
यूँहीं घूमते-घूमते पेड़-पौधों पर खेलती चिड़िया और नाचती-भागती तितलियों ने हमारा मन मोह लिया तो हमने उन्हें इस तरह अपने पास रख लिया

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5 Responses to “यूँहीं घूमते-घूमते मन उनके साथ उड़ चला”

  1. अविनाश वाचस्‍पति Says:

    दूसरी फोटो में कौन है

    फोटो चुप है

    मौन है

  2. dksuchi Says:

    ye titliyan un abhivyakti ko darsha rahi hain jo aake hriday me ab bhi vidyaman hain . photo-graphs says the things which anyone and every want to say ………..
    aur sabke ant me ,सुन्दर चित्र और सुन्दर अभिव्यक्ति।

  3. संगीता पुरी Says:

    अच्‍छी पोस्‍ट …

  4. shobha Says:

    सुन्दर चित्र और सुन्दर अभिव्यक्ति।

  5. anil kant Says:

    photos bahut sahi hain

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