अति

१.

विकि और मोमी दोनों किसी अमेरिकन कंपनी में काम करते थे। लाखों में सेलरिज़ थीं। एक सुपर एच.आई.जी. फ्लैट फाइनेंस कराकर लिया था। जिसकी क़िश्त भी एक बड़ी रक़म होती है। दोनों के पास बड़ी-बड़ी गाड़ियाँ हैं जिनकी भी क़िश्तों की रक़म बड़ी-बड़ी हैं। माँ-बाप साथ में रखने इसलिए पसंद नहीं थे क्योंकि पत्नी उनके (अनपढ़ों के) साथ एडजस्ट नहीं होती थी, इसलिए एक नौकरानी फुलटाइम घर में थी।
पर्यावरण प्रदूषण की तरह मंदी ने प्रभाव दिखाया तो नौकरी गयी हाथ से दोनों की। सारे जलवे भूषण की कविता की तरह सोचने की दिशा देते हैं। ’बिजन डुलवातीं थीं ते बिजन डुलाती हैं’। निराशा में जी रहे हैं। लेकिन माँ-बाप हैं अपने पुत्र को आर्थिक मार से बचाने के जुगाड़ में घर और ज़मीन बेचने को तैयार हैं। उन्हें डर है कि कहीं बेटा कुछ कर न बैठे। अनपढ़ जो ठहरे। अक़्ल नहीं है। बुढ़ापे में रोटी को तरसेंगे।

२.

नामि का विवाह हुए कुछ महीने हो गए हैं, शादी बड़े ही धूमधाम से हुई। नामि पति के साथ अमेरिका चली गयी।
कल अचानक उसकी मम्मी का फोन आया। बड़े हल्केपन से होली की शुभकामनाएँ दीं। पूछने पर पहले तो कुछ बोलीं नही, जब ज़्यादा कुरेदा तो पता चला कि दामाद की नौकरी छूट गयी है। बहुत परेशान है। शुरु में तो आस लगी रही कि शायद कहीं और जुगाड़ हो जाए। पर अब आस टूट गयी है। मकान का किराया और अन्य खर्चा भारी पड़ रहा है। वापिसी की सोच रहा है। अब यहाँ कौन सी आसानी से नौकरी मिल जाएगी? माँ-बाप बहुत चिंतित हैं।

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7 Responses to “अति”

  1. mehek Says:

    na jaane kyun ye comment ka box jeevan paheli aur green tree ke post pe nahi khul raha,dono kavita bhi pehle hi padhi thi aur bahut pasand aayi magar comment hi na kar paaye,aur green tree adoption wali baat bahut bahut achhi lagl.

  2. mehek Says:

    kadwa sch hai.

  3. premalata pandey Says:

    धन्यवाद ! सभी का टिप्पणी हेतु।

  4. संगीता पुरी Says:

    अति के बाद इति का होना प्रकृति के कुछ नियमों में से एक है … पर हमारा दुर्भाग्‍य कि हम इसे समझ नहीं पाते हैं।

  5. mahendra mishra Says:

    सही है कहते है अति सर्वत्र वर्जते …..यह कथन सभी बातो पर लागू होता है . आभार.

  6. समीर लाल Says:

    दुख होता है.

  7. समीर लाल Says:

    यही यथार्थ है-

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