हम साथ हैं
By प्रेमलता पांडे
दुनिया में नये हैं,
ठीक से चलना भी नहीं आता है।
किसी से वास्ता नहीं पड़ा है।स्कूल की इमारत इनकी जन्मभूमि है।
माँ ही संसार है। किसी और को नहीं जानते।
माँ सामने हो तो कोई इनके पास भी नहीं फटक सकता।
Tags: पप्पी, पिल्ले, स्वान के बच्चे
This entry was posted on May 27, 2008 at 18:39 and is filed under चित्राकंन. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0 feed.
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May 27, 2008 at 23:15 |
बड़े ही मोहक और प्यारे हैं.
May 27, 2008 at 20:49 |
May 27, 2008 at 19:01 |
bahut he badhiya