हाइकू-रामायण

By प्रेमलता पांडे

अयोध्या राज।
चक्रवर्ती राजन।
वृद्ध ह्वै जाएं।।

कौशल राज,
सुतविहीन हाय!
भए उदास॥

कीन तपस्या,
मिले ये वरदान,
हो पुत्रवान॥

श्रृंगी बुलाए,
आहुति यज्ञ दिए,
पुत्रकामेष्टि।

बीते नौ मास ,
कौशल्या के गर्भात,
प्रकटे राम।

मात सुमात्रा,
लछमन -शत्रुघ्न,
जनमे साथ॥

जने महान,
कैकई महारानी,
भरतलाल॥

चंचल नैन,
बांकी भृकुटी बैन,
छवि निहाल।।

छन-पैंजनि,
रुम-झुम बाजनि,
चलत-चाल॥

धावत राम,
भजैं पाछे मईया,
मचे ता थै या॥

युगल जोड़ी,
करें क्रीड़ा हो-होड़ी,
खेल-हंसोड़ी॥

गुरु बुलाए,
अवसर मिलाए,
संग पठाए॥

धनुष-बाण,
चौदह-कला ज्ञान,
गुरु की कृपा॥

ज़ारी…

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6 Responses to “हाइकू-रामायण”

  1. Sarvesh Kumar Tiwari Says:

    rAma setu par bhI shIghra racheM

  2. Sarvesh Kumar Tiwari Says:

    uttam. sAdhuvAd!

  3. Pramendra Pratap Singh Says:

    बढि़या लिखा है बधाई

  4. प्रेमलता पांडे Says:

    धन्यवाद।

  5. राजीव रंजन प्रसाद Says:

    बहुत अच्छा प्रयोग है, इस रचना की अन्य कडियों की प्रतीक्षा रहेगी।

    ***राजीव रंजन प्रसाद

  6. समीर लाल Says:

    बहुत उम्दा प्रयोग है..इन्तजार है अगली कड़ी का. बधाई.

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