दर्शनम
By प्रेमलता पांडे

कलियुग में नाम संकीर्तन से प्रभु की प्राप्ति में लीन होने की प्रेरणा देने वाला दिल्ली का इस्कॉन मंदिर अपनी भव्यता के लिए भी प्रासिद्ध है।

Tags: darshan, fountain
This entry was posted on May 7, 2008 at 22:36 and is filed under चित्राकंन. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0 feed.
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May 8, 2008 at 15:32 |
धन्यवाद।
May 8, 2008 at 13:44 |
धन्यवाद दर्शन करने के लिए..
May 8, 2008 at 10:12 |
आभार समीर भाई!
May 8, 2008 at 08:38 |
एल निवेदन:
आप हिन्दी में लिखते हैं. अच्छा लगता है. मेरी शुभकामनाऐं आपके साथ हैं इस निवेदन के साथ कि नये लोगों को जोड़ें, पुरानों को प्रोत्साहित करें-यही हिन्दी चिट्ठाजगत की सच्ची सेवा है.
एक नया हिन्दी चिट्ठा भी शुरु करवायें तो मुझ पर और अनेकों पर आपका अहसान कहलायेगा.
इन्तजार करता हूँ कि कौन सा शुरु करवाया. उसे एग्रीगेटर पर लाना मेरी जिम्मेदारी मान लें यदि वह सामाजिक एवं एग्रीगेटर के मापदण्ड पर खरा उतरता है.
यह वाली टिप्पणी भी एक अभियान है. इस टिप्पणी को आगे बढ़ा कर इस अभियान में शामिल हों. शुभकामनाऐं.
May 8, 2008 at 01:12 |
आभार दर्शन करवाने के.