श्रीमती अबस के तीन बेटियाँ हैं। उनके पति अवकाश प्राप्त कर चुके हैं पर अब भी कहीं कुछ अन्य काम करने जाते हैं। अबस की दो बड़ी बेटियाँ अपने परिवार के साथ उनके शहर में , उनके घर के आसपास ही रहतीं है जबकि सबसे छोटी कहीं विदेश में। हर तीज-त्योहार बेटियाँ उनके घर आकर मनाती हैं। हारी-बीमारी में माँ-बाप का ध्यान रखतीं हैं।बड़ी दोनों बेटियों के दो-दो बच्चे हैं जो नानी के पास ही पले बढ़े हैं। नानी की और उनकी बहुत पटती है। अब सारे बच्चे स्कूल जाते हैं और लौटकर नानी के यहाँ खेलते हैं। शाम को जब मम्मी आतीं है उनके साथ अपने घर चले जाते हैं। अबस अपनी स्थायी आया के साथ घर का काम संभलवाती रहती हैं। चूँकि अबस रोज घर में रहतीं है तो उनकी इच्छा रहती है कि रविवार को चर्च के अलावा कहीं घूमने भी जाया जाए। वह पहले से ही प्रोग्राम बनाकर रखतीं हैं।
उनके पास गाड़ी नहीं है, पर दोनों बेटियों के पास है। दोनों बेटी और दामाद अपने साथ उनको गाड़ी में ले जाते हैं, परंतु दामादों को हफ़्ते में एक ही छुट्टी मिलती है, उनका काम रोजाना देर रात तक समाप्त होता है और सुबह उन्हें जल्दी जाना पड़ता है। एक रविवार ही होता है जब॔ वे आराम कर सकते हैं और घर में रह सकते हैं। वे अबस को मना नहीं कर पाते हैं, पर उत्साह भी नहीं दिखा पाते हैं। माँ से मना करना नहीं चाहते और न खुद …..चाहते। क्या करें? आजकल जीवन बड़ा जटिल हो गया है। सच में कोई भी तो गलत नहीं और न हीं उपेक्षा कर रहा है पर…? करें तो क्या करें? जिससे माँ का मन भी न मरे और उनकी छुट्टी घर पर मने।
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March 9, 2008 at 22:04 |
सही कह रही हैं …आजकल जीवन जटील है.
उ० धन्यवाद समीर भाई।
March 9, 2008 at 19:36 |
haa wo apni betiyon ke saath ghume,damad gha reh sakte ha,hala ki betiyon ko bhi pati ke saath waqt chahiye,ek ravivar ek beti ke saath samay gujare,duja dusri ke saath,kabhi unke parivar ke saath ,wo apna samay apne hum umar saheli group ke saathbita sakti hai,aaj kal transportation ke liye taxi hai,kabhi bas nati ke saath hi ghum sakti hai.
उ० धन्यवाद महक़!
March 9, 2008 at 17:21 |
श्रीमती अबस अपनी बेटियों के साथ घूम आयें – दमादों को घर में आराम करने दें।
उ० टिप्पणी और सुझाव हेतु धन्यवाद।