बच्चों को डराएँ नहीं|
बॉर्ड की परीक्षा सिर पर हैं। बच्चे अपने-अपने हिसाब से मेहनत कर रहे हैं। हर बच्चा अपना अच्छा परिणाम लाने की आशा करता है। पर सभी एक से परिणाम नहीं लाते पाते! इसके अनेक कारण हैं जिनकी चर्चा अलग हो सकती क्यों कि यह एक स्वतंत्र विषय है। यहाँ कुछ हलकी फुलकी बातों का ज़िक्र कर रहे हैं।-
अब समय बच्चों का हौंसला बढ़ाने का है। माँ-बाप को इस विषय में सजग रहना चाहिए। बचा डर से दबाब में न आ जाए।
-बच्चा न तो आत्मविश्वास में डूब ही जाए और न ही आत्मविश्वास से अछूता रहे । इसके लिए उसे पूर्ण तैयारी में विश्वास करना चाहिए।
- बच्चा स्ट्रेस में न रहे पर लापरवाह भी न हो। तैयारी सीरीयसली करे पर खुद सीरीयस न हो जाए। - घर का वातावरण शांतिपूर्ण हो पर बोझिल न हो हर समय परीक्षा की बात ही न होती रहे।
- हर वक्त बच्चे को टोकते न रहें। उसे पढ़ने के साथ-साथ थोड़ा व्यायाम और मनोरंजन अवशय करने दें।
- बच्चे के खाने का खास ख्याल रखें। वह गरीष्ठ खाना खाने से बचे, ताजा, हलका और पौष्टिक भोजन ही करे।
-बहुत ज़रुरी हो तभी माता-पिता कई दिन के लिए घर से दूर जाएँ। परीक्षा देने वाले बच्चे पर इसका असर पड़ता है।
- बच्चे को हल्की सी भी शारीरिक परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। अपनी न चलाएँ।
- बच्चे को ऐसे कामों और खेलों से दूर रखें जिनसे उसे चोट प॔हँच सकती है।
यूँ तो हर माता-पिता अच्छा ही करते हैं, परंतु कई बार अच्छा समझ कर भी हम गलत कर जाते हैं। इसलिए यदि बच्चा ज़्यादा घबरा रहा हो तो निर्देशन और विमर्श के विशेषज्ञ से सलाह लेने में न सकुचाएँ।
शुभकामनाएँ।
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February 15, 2008 at 22:34 |
छोटी मगर बहुत जरुरी बातें कहें.
उ०- धन्यवाद भाई।