माने या न माने ऐसा ही होता है…
शिवांगी तीन साल की है। उसके दो बड़े भाई हैं जिनकी आयु लगभग पाँच और सात साल है। एक दिन उसकी मम्मी फॉन पर किसी से बात कर रही थी, तभी धड़ाम की आवाज़ आई। कुछ पल में ही शिवाँगी रोती हुई आ गयी और और तेज़ आवाज़ में रोने लगी। जब माँ ने प्यार से सहलाते हुए चोट के बारे में पूछा तो बोली-” जब मैं पलंग से लुढ़क गयी थी तो मनीष (उससे बड़ा भाई) मुझे देखकर हंस रहा था।”
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February 1, 2008 at 4:11 pm
बचपन ऐसा ही होता है। चोट से ज्यादा परवाह और गुस्सा उस हंसी पर था।
उ०= टिप्पणी हेतु धन्यवाद।