गांधीजी क्यों याद आ रहे हैं?

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आज गांधी जयंती है, गांधीजी को याद कर रहे हैं। क्यों भूल गए थे?  जो  याद कर रहे हैं! शायद कुछ हाँ और कुछ न!

  गांधी जी के रास्ते इतने कठिन और  अनवरत थे !  जिनके लिए उन्हें स्वयं प्रयोग और अभ्यास करने पड़े थे;  पर उन्होंने हार नहीं मानी थी और सिद्ध कर  गए थे उनकी उपयोगिता।

   

आज गांधीजी जितने सामयिक हैं शायद इतने तो वे अपने समय में भी न थे!     आज विकास के साथ-साथ हिंसा, असत्य और  घृणा का भी विकास हुआ है।  हाँ उसका रुप बदल गया है। उससे मुक्ति के लिए गांधीजी के बताए रास्ते पर ही चलना होगा, परंतु उन रास्तों का भी नवीनीकरण  आवश्यक है।   नयी पीढ़ी जो मेहनत में किसी रुप में भी पुरानी पीढ़ियों से कम नहीं है बल्कि और आगे है,  के लिए  घर समाज और शिक्षा-स्थल  इत्यादि सभी स्थानों पर  गाँधीजी के  प्रयोग और यंत्र अनिवार्य होने चाहिए। यह  मात्र पाठ्यक्रम में लागू करने से नहीं होगा  बल्कि रीतिरिवाज़ चलाने पड़ेंगे  जो सरकार नहीं बल्कि समाज की ज़िम्मेवारी है।  सत्य और स्नेह का पाठ कभी भी क़िताबों में पढ़कर नहीं आ सकता जब तक कि परिवार से न सीखने को मिले। 

   

गांधीजी ने कोई नया रास्ता नहीं सुझाया था बल्कि सदियों से सूफ़ी, संतों और महात्माओं के  बताए रास्तों को ही  जीवन में आसानी से  उतारने  की ही बात कही थी , फिर हम क्यों उन  सीखों को  न अपनाएँ ?    यदि सभी जन सच बोलने की ही ठान लें तो बाक़ी सभी बुराइयाँ स्वतः ही दूर हो जाएँगीं।

गांधी व्यक्ति की नहीं बल्कि गांधी विचार की  ज़रुरत है।

भ्रष्टाचार और आतंकवाद सत्य और अहिंसा के आगे बहुत बौने हैं। हमें दूसरों की बजाय  अपने आप  को परखना  चाहिए  और अपनी आने वाली पीढ़ी को  सुखद वातावरण  की विरासत सौंपनी चाहिए।  अपने मन और कर्म से झूठ और  घृणा को मिटाकर ही हम प्रेम और अहिंसा का  प्रयोग कर सकते हैं। यह बंजर भूमि को खेती योग्य बनाने हेतु परिश्रम जैसा तो है परंतु  अप्राप्य बिल्कुल नहीं है।

2 Responses to “गांधीजी क्यों याद आ रहे हैं?”

  1. समीर लाल Says:

    महात्‍मा गांधी जी के जन्‍म दिवस पर शत शत नमन.

    - शत-शत नमन।

  2. दीपक श्रीवास्तव Says:

    आपकी बात बिल्कुल सही है हमें इन रास्तों पर चलना चाहिए

    - धन्यवाद।

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