चलें गाँव की ओर…
१. एक दिन एक गाँव में जाने पर-
. ये चित्र बताते हैं वह सबकुछ है।
२. भोले-भाले बच्चों का मनोरंजन, खेल और ज़िम्मेदारी?
३. माइक्रोवेव-अवन और गैस के जमाने में यह बिटौरा!!!
४. मेट्रों ट्रेन के मुकाबले बुग्गी/बैल गाड़ी !
पूरे परिवार को वहन कर सकती है कि नहीं?
५.बड़े-बड़े शहरों में पंछी की ध्वनि को भी तरसें हैं,
यहाँ तो मोर भी दिवार पर बैठा है!
६.पौहों की खोर!
सानी करना भी हरेक के बस की बात नहीं है!