बताओ तो जानू-५

By प्रेमलता पांडे

चार अक्षर का मेरा नाम,

टिमटिम तारे बनाना काम,

शादी, उत्सव या त्योहार,

सब जलाएँ बार-बार।   

तीन पैर की चंपा रानी,

शाम-सवेरे नहाय,

चावल-दाल को छोड़कर,

कच्ची रोटी खाय।   

सुबह-सुबह ही आता हूँ,

दुनिया की खबर सुनाता हूँ,

बिन मेरे उदास हो जाते,

सबका प्यारा रहता हूँ।   

  

पैर नहीं हैं,

पर चलती रहती,

दोनों हाथों से अपना मुंह पोंछती रहती।     

उत्तर-

१ फुलझड़ी,

२ चकला-बेलन,

३ अख़बार,

४. घड़ी।

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