बताओ तो जानूं – ४

By प्रेमलता पांडे

मुझे उलट  कर देखो,

लगता हूँ   मैं  नौ जवान,

कोई अलग न रहता  मुझसे,

बच्चा, बूढ़ा और जवान॥  

पत्थर पर पत्थर,

पत्थर पर पैसा,

बिन पानी घर बनाए, 

वह कारीगर कैसा?  

सरपट लगा हरा झंडा,

कितना मीठा और रसीला॥   

सफेद   तन हरी पूंछ,

न बुझे तो नानी से पूछ॥

५.

तीतर के दो आगे तितर,

तीतर के दो पीछे तीतर,

बोलो कितने तीतर।  

उत्तर-

१. वायु,                 २. मकड़ी,     

३. गन्ना,             ४. मूली,        ५. तीन।       

Leave a Reply