सुबह बसस्टॉप के पास अलग ही कुछ हो गया। हुआ यूँ कि अच्छे व्यक्तित्त्व की धनी, आकर्षक पोषाक पहने बड़ा सा बैग कंधे पर लटकाए महाविद्यालय की एक छात्रा बस पकड़ने के लिए आ रही थी। सड़क पर बहुत भीड़ थी। साइकिल वाले अपनी धुन में भागे जा रहे थे मानों दौड़ में भाग ले रहे हों, मोटरसाइकिल, स्कूटर और कार के अतिरिक्त बसों की रैली सी निकल रही थी। तभी साइकिल पर सवार एक अधेड़ व्यक्ति ने चलती लड़की के कंधे पर हाथ रखते हुए मुस्करा कर कुछ कह दिया जो बिना सुने भी लड़की के हावभाव देखकर समझा जा सकता था कि असहनीय शब्द कहे गए होंगे। बस फिर क्या था लड़की ने उस आदमी के दो थप्पड़ मारकर साइकिल से नीचे खींच लिया और दो फिर मारे बस अब तो वह आदमी जो उस लड़की से फबती कस रहा था साईकिल छोड़कर ऐसे भागा जैसे गधे के सिर से सींग! लड़की गुस्से में थी उसने उस आदमी का गिरा हुआ लंचबॉक्स नाली में फेंक दिया और साईकिल को तोड़मरोड़कर खुले गटर में गिरा आयी। लड़की हिम्मती थी बिल्कुल नहीं डरी। बाद में बस पकड़कर गंतव्य की ओर चली गयी। उसने उस आदमी को ऐसा सबक सिखाया कि वह पूरी ज़िंदगी याद रखेगा। सच लड़कियों को ऐसा ही स्वाभिमान और हिम्मत रखनी चाहिए और बिना घबराए कुदृष्टि डालने वालों की ऐसे ही अक़्ल ठिकाने लगानी चाहिए। तभी वह जीवन में अपनी रक्षा कर पाएगी। शाबाश मुन्नी!!!
(मुन्नी प्यार से संबोधित किया है उसका नाम और परिचय तो पता नहीं।)
April 12, 2007 at 22:13 |
Sabhi aacharaN sahi lage hamey to, uss Munni key.
jyotish par aapke agaley laikh kaa intezaa ho raha hai.
Ripudaman Pachauri
April 5, 2007 at 20:18 |
Marne tak to bahut theek tha lekin lunch box aur saaikil ko naali mein daalne ki baat kuch jayada ho gai. Well good brave girl.