पंचांग अर्थात पाँच अंग| तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण मिलकर पंचांग बनता है।
तिथि की बात पहले हो चुकी है। वार तो हम सभी जानते हैं। नक्षत्र-परिचय हो चुका है।
योग-
सूर्य और चंद्रमा जब एक नक्षत्र से ८०० कलाएँ आगे निकल जाएं तो एक योग निकल चुका माना जाएगा। इसप्रकार जब २१६००कलाएँ (१२राशियाँ) आगे निकल जाएं तो २७ योग बीत जाते हैं ऐसा माना गया है। इन योगों की संख्या २७ है। नाम इसप्रकार हैं-
१-विष्कंभ, २- प्रीति, ३-आयुष्मान,
४- सौभाग्य, ५- शोभन, ६- अतिगण्ड,
७- सुकर्मा, ८- धृति, ९- शूल,
१०- गंड, ११-वृद्धि, १२-ध्रुव,
१३-व्याघात, १४- हर्षण, १५- वज्र,
१६- सिद्धि, १७- व्यतीपात, १८- वरीयान,
१९- परिघ, २०- शिव, २१- सिद्ध,
२२- साध्य, २३-शुभ, २४- शुक्ल,
२५- ब्रह्मा, २६- ऐन्द्र और २७-वैधृति।
करण-
ज्योतिष में तिथि के आधे भाग को करण कहा गया है। कुल ग्यारह नाम के करण हैं।
(१) बव, (२) बालव, (३) कौलव,
(४) तैतिल, (५) गर, (६) वणिज,
(७) विष्टि, (८) शकुनि, (९) चतुष्पाद,
(१०) नाग, (११) किस्तुघ्न।
इन सभी अर्थात पंचांग केगहन अध्ययन के द्वारा प्राचीन समय में ज्योतिषी मौसम की भविष्यवाणी करते थे और उसी के अनुरुप कार्य करने या न करने की सलाह दिया करते थे, जिसे मुहूर्त कहा जाता है।
अप्रैल 4, 2007 at 19:20 |
इस पर यथासमय एक पूरी पोस्ट में लिखा जाएगा।
अभिरुचि और टिप्पणी हेतु शुक्रिया।
अप्रैल 4, 2007 at 18:01 |
हाँ हम भी तो यही पूछ रहे हैं कि ८००x२७ = २१६०० कैसे हुआ ?इसका गणित स्पष्ट नहीँ हुआ|
अप्रैल 3, 2007 at 21:54 |
८०० कला = १ योग,
८००x२७ = २१६००कलाएं ( १२ राशियां पार करने पर २७ योग पूरे कहे गए हैं)।
अप्रैल 3, 2007 at 21:22 |
“सूर्य और चंद्रमा जब एक नक्षत्र से ८०० कलाएँ आगे निकल जाएं तो एक योग निकल चुका माना जाएगा। इसप्रकार जब २१६००कलाएँ (१२राशियाँ) आगे निकल जाएं तो २७ योग बीत जाते हैं ऐसा माना गया है।”
इसका गणित स्पष्ट नहीँ हुआ| कृपया बतलायेँ |
रिपुदमन पचौरी