भारत की पहचान…

दीपावली

जब सब घर सज जाएं,

लड़ियाँ भी लग जाएं।

सुर्री और फुलझड़ियाँ छोड़ें,

रॉकेट और बम भी फोड़ें।

पट-पट पट पटाख़े बोलें,

चरखी और अनार भी डोलें।

खुशी मनाएं,खाएं मिठाई,

भैया आई दिवाली! आई दीवाली! आई!!! 

होली

पतझड़ बाद जब पत्ते आते!

पेड़ नए-नए हो जाते!

फूल खिलखिलाकर मुस्काते,

उन पर भंवरे भी मंडराते।

रंग-गुलाल-अबीर उड़ाते,

हम सब टोली में बँट जाते।

भर पिचकारी खूब भिगाते,

गुझिया, पापड़, भल्ले खाते।

हंस-हंस कर सब शोर मचाते,

यूं होली का पर्व मनाते।

राखी

बाज़ारों में राखी सज गयीं,

बहना के भी मेंहदी लग गयी।

भैया ने नए कपड़े पहने,

बहनों के हैं नए गहने।

बांध के राखी भैया के!

मिले रुपैया भैया से!

किया तिलक लाल चंदन का,

है त्योहार रक्षाबंधन का!!! 

दशहरा

रावण सीता को हर लाया,

राम का संदेसा आया।

पर रावण ने एक न मानी,

रामजी से रार ठानी।

हुई लड़ाई बहुत ही भारी,

रावण की तो मति गयी मारी।

रावण मार रामजी जीते,

वापिस आए  लेकर सीते।

घर-घर में हुई खुशी अपार,

मना दशहरा का त्योहार। 

ईद

रोज़े बाद ईद है आती,

सारे में खुशियाँ भर जातीं!

नए-नए कपड़े सिलवाते,

सबको  ईदी भी दिलवाते।

खाएं मिठाई और सेवैंया,

गले मिलें प्यार से भैया।  

क्रिसमस

जंगलों के बीच में,

जानवरों की चीख़ में।

मदर मैरी ने जन्म दिया,

प्यारा ईसु हमें दिया।

जन्म-दिन  मनाते हैं,

क्रिसमस ‘ट्री’ सजाते हैं।

सेंटाक्लॉज आते हैं,

उपहार हमें दे जाते हैं!

खुशियों से  भर जाते हैं,

केक-पेस्ट्री खाते हैं!!! 

पंद्रह अगस्त 

अंगरेजों को भगा दिया!

तिरंगा उँचा लगा दिया!

जयहिंद का नारा गूँजा!

भारत से सुंदर न दूजा!

आजादी को पालेंगे!

जान भी दे डालेंगे!

देश-प्रेम के गीत गाएं,

आजादी का पर्व मनाएं। 

छब्बीस जनवरी

गणतंत्र भारत बन गया!

विश्व में नाम बढ़ गया।

क़ानून बनाया अपना,

जो था एक  सपना।

राजेन्द्र-भीमराव थे,

रचा  संविधान  शान से।

 छ्ब्बीस जनवरी मनाते हैं,

देश के गुण गाते हैं!!! 

गुरु पर्व 

गुरु नानक ने जन्म लिया,

सबको ‘एक’ का उपदेश दिया।

सिक्ख-पंथ की शान बनायी,

दुनिया को नीति सिखलायी।

नानकवाणी जब होती शुरु!

हम भी कहते -वाह गुरु,

वाह गुरु, वाह गुरु॥

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