बरसाने की होली

By प्रेमलता पांडे

 

 

 

ग्वालिन आयी।

 

लाला होरी मचायी।

 

खूब भिगायी॥

 

 

हाहा सी खायी।

 

नैक दया ना आयी।

 

रंग डुबायी॥

 

 

लाला! ना फेंको!

 

रंग गुलाल देखो!

 

माई रोको तो॥

 

 

रसाने आ!

 

दूं तुझे पूरा भिगा!!

 

खेलें होली आ॥

 

 

(बरसाने में)

 

बचना कान्हा!

 

होली तो है बहाना!

 

तुझे बताना॥

 

 

होरी के वेष!

 

बरसाने में खेंच!

 

पीटे ब्रजेश॥

 

 

लट्ठन मारे!

 

भागे गोकुल सारे!

 

होली है प्यारे॥

 

 

मार ना गोपी!

 

होरी कोई यों होती!

 

मन की खोटी॥

 

 

बुरा ना मानौं।

 

कन्हैया होरी जानौं।

 

रार ना ठानौं॥

 

१०

 

मोर-मुकुट!

 

पीताम्बर लकुटि!

 

भीगी भ्रकुटी!!!

 

११

 

रंग अर्जित!

 

श्री संग सुसज्जित!

 

राग-रंजित॥

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