ब्रज की होली

By प्रेमलता पांडे

 

 

कदम्ब छांव।

 

मारे होली के दांव।

 

ब्रज के गांव॥

 

नंद-यशोदा।

 

लाए होरी कौ सौदा।

 

कान्हा है मोदा॥

 

हे ग्वाल-बाल!

 

बजाओ ढ़प ताल!!!

 

मचे धमाल॥

 

कान्हा कौ सखा।

 

दामा दाऊ ने लखा।

 

भागा वो झखा॥

 

रंग ले भागे।

 

कान्हा के दामा आगे।

 

अब ना लागे॥

 

दाऊ आओ तो!

 

याकू रगड़ो पोतो!

 

जो भागे रोतो॥

 

कृष्ण-सुदामा!

 

ह्वै  रहयो हंगामा!

 

दाऊ श्रीदामा॥

   

One Response to “ब्रज की होली”

  1. मन जा बैठा वा चौराहे के बीच « पसंद Says:

    [...] होली पर कई जगह पहले भी लिखा है। यहाँ और वहाँ। पर आज मन उड़ चला उस चौराहे पर [...]

Leave a Reply