रंग रास

By प्रेमलता पांडे

 १

ले टेसू फूल

यमुना जी के कूल,

भीगे दुकूल॥ 

वृषभानुजा

खेलें होली आ तो जा,

ना दे यूं सजा॥ 

क्यों मैं आऊं?

रंग में रंगी जाऊं?

भीगी हो जाऊं!!!

 दाऊ कान्हा के!

चित्तचोर राधा के!!!

रंगे आ आ के॥ 

श्याम रंग है?

राधे कौन संग है?

गोप-वृंद है॥ 

कान्हा मुस्काए,

सब रंग जुटाए,

ना डरपाए॥ 

श्यामसुंदर!

राधामय होकर!

लगें मोहक॥ 

श्यामा छिपी हैं!!!

कान्हा ने लख ली हैं!

पूरी रंगी हैं!!!

कृष्ण राधे हैं।

पिचकारी साधे हैं।

भीगे आधे हैं॥ 

१०

रंग रास है!!!

राधे श्याम पास हैं।

द्रव गात हैं॥ 

११

जोड़ी खड़ी है।

पुलकित बड़ी है।

रंग चढ़ी है॥ 

१२

यशोदा संग,

राधे श्याम की होली!!!

लखत नंद॥ 

१३

सच्चा प्यार है।

शिष्टता आचार है।

यही सार है॥

One Response to “रंग रास”

  1. मन जा बैठा वा चौराहे के बीच « पसंद Says:

    [...] होली पर कई जगह पहले भी लिखा है। यहाँ और [...]

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