कौन कहता है?
अंधेरे में दिखाई नहीं देता है
सच बात तो यह कि
अँधेरा ही मन की आंखें खोल देता है।
कौन कहता है?
कि अंधेरे में बुराई होती है,
सच बात तो यह है कि
अँधेरे ने ही पहचान मिटाई होती है।
कौन कहता है?
अंधेरे में दिखाई नहीं देता है
सच बात तो यह कि
अँधेरा ही मन की आंखें खोल देता है।
कौन कहता है?
कि अंधेरे में बुराई होती है,
सच बात तो यह है कि
अँधेरे ने ही पहचान मिटाई होती है।