श्रावण-मास
शुक्ल-पक्ष पूर्णिमा
रक्षाबंधन।
बहिन-भाई
राखी रोली चावल
मुँह मिठाई।
राखियाँ सोहें
भ्राता-भगिनी मोहें
खुशियाँ जो हैं।
शुभ मनाएँ
राखी बांधें या भेजें
भाई चहकें।
यह त्योहार
बाल-वृद्ध जवान
खुश समान।
बंधन-देखें
राखी नेट पर हैं
मन से सोचें।

August 10, 2006 at 22:01 |
dhanyavaad manIsh jI. haiku bhi to likhe hain.
August 9, 2006 at 15:35 |
फोटोशाप पर राखी की सुंदर झड़ियाँ लगादीं आपने तो !